हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के भाषा एवं आधुनिक ज्ञान-विज्ञान विभाग की ओर से हिंदी समारोह के अंतर्गत ऑनलाइन राष्ट्रीय हिंदी व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘पंजाब प्रदेश की हिंदी साहित्य को देन’ रहा। अध्यक्षता कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने की।
मुख्य वक्ता हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. हर महेंद्र सिंह बेदी ने कहा कि पंजाब और हिंदी साहित्य का संबंध सदियों पुराना है। पंजाब के साहित्य को समझे बिना हिंदी साहित्य के इतिहास को पूर्ण रूप से समझना संभव नहीं है। उन्होंने ऋग्वेद, पाणिनीय अष्टाध्यायी, श्री गुरु नानक देव की वाणी और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संदर्भ में पंजाब के साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि सिद्ध-नाथ परंपरा, भक्तिकाल और उत्तर-मध्यकालीन बोलियों के विकास में पंजाब की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संत कबीर सहित अनेक संतों की वाणी को श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में पंजाब और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को शामिल करना आवश्यक है।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. दिनेश चंद्र चमोला ने वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ अपने अनुभव साझा किए। डॉ. अनूप बहुखंडी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। भाषण प्रतियोगिता में सिद्धार्थ जोशी प्रथम, अनीता द्वितीय और सुमित ढौंडियाल तृतीय रहे।
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