हरिद्वार। लोगों की सेहत और पर्यावरण से खिलवाड़ का मामला सामने आने के बावजूद जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। सिडकुल क्षेत्र में पेंटागन मॉल के पीछे सूखी रो नदी में एक्सपायर दवाइयां और कंपनी के रैपर मिलने के दो दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने से कंपनी की लापरवाही के साथ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। खुले में पड़े दवा कचरे को लेकर शिकायत के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन अब तक कार्रवाई का ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
नदी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में एक्सपायर दवाइयां मिलने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। दवाइयों का इस तरह खुले में फेंका जाना पर्यावरण के लिए खतरा बन सकता है। दवाओं के रासायनिक तत्व मिट्टी और जलस्रोतों को दूषित कर सकते हैं, जिसका असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में दवा कचरे का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करना संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी है।
मामले की सूचना मिलने पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया। विभागीय अधिकारी के मुताबिक, मौके पर एक्सपायर दवाइयां और कंपनी के रैपर मिले हैं। नियमों का उल्लंघन साबित होने पर जुर्माना लगाने, लाइसेंस निलंबित करने या निरस्त करने और कंपनी बंद कराने तक की कार्रवाई संभव है।
सवाल यह है कि जब दवा कचरा खुले में मिला और मामला अधिकारियों के संज्ञान में आ गया, तो दो दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार कंपनी से जवाबदेही तय की जाएगी या मामला केवल जांच और चेतावनी तक सीमित रहेगा? फिलहाल कंपनी और संबंधित विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई का इंतजार है।














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