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पांच मदरसे सील, हाईकोर्ट में चुनौती…नई व्यवस्था पर उत्तराखंड में बढ़ा घमासान

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हरिद्वार। उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर अब प्रशासन और संचालकों के बीच टकराव खुलकर सामने आने लगा है। प्रशासन ने बिना पंजीकरण संचालित किए जा रहे पांच मदरसों को सील कर दिया, वहीं नई व्यवस्था और मान्यता संबंधी प्रावधानों के खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
बुधवार को एसडीएम बाजपुर ऋचा सिंह के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने मदरसों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान संचालक मान्यता और पंजीकरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पांचों मदरसों को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा।
सील किए गए मदरसों में गुलशन इस्लाम, कनोरा बाजपुर; जामिया इनकिया रंगा उल उलूम, चकरपुर; जामिया पातिमा जेहरा, जगन्नाथपुर-बाजपुर; मोईनुल उलूम, मोहल्ला गांधीनगर, केलखेड़ा और हुज्जतुल इस्लाम, गुमसानी रोड, बाजपुर शामिल हैं।
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एक्शन के बीच हाईकोर्ट पहुंचा मामला

नई मदरसा शिक्षा व्यवस्था और मान्यता संबंधी प्रावधानों को कुछ संचालकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और शिक्षा बोर्ड से मान्यता की अनिवार्यता के चलते उन्हें व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अब 15 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई और न्यायालय में चल रही चुनौती के बीच मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर मामला और गरमा गया है।
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धामी का साफ संदेश-नियम मानने ही होंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि मदरसा संचालकों को निर्धारित नियमों का पालन करना ही होगा। वहीं, डीएम नितिन भदौरिया ने भी स्पष्ट किया कि मदरसों का निरीक्षण अभियान जारी रहेगा। निर्धारित मानक और जरूरी शर्तें पूरी किए बिना किसी भी मदरसे को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि सरकार हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। उनके मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
अब निगाह 15 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई पर है। जहां नई मदरसा व्यवस्था को लेकर सरकार और याचिकाकर्ताओं का पक्ष सामने आएगा।

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