रुड़की। मुजफ्फरनगर की शालू सैनी ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश करते हुए सड़क किनारे मिले एक बुजुर्ग के शव का बेटी बनकर अंतिम संस्कार किया। साईं बाबा मंदिर के सामने स्टेशन के पास स्थित अपने फास्ट फूड स्टॉल के समीप बुजुर्ग कई दिनों से रह रहे थे और मांगकर अपना गुजारा करते थे। निधन के बाद उनका कोई परिजन सामने नहीं आया।
शालू सैनी ने स्वयं बुजुर्ग को अपना पिता मानते हुए अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई और पूरे सम्मान के साथ उन्हें मुखाग्नि दी। उन्होंने कहा कि बाबूजी कई दिनों से उनके ठेले के पास सोते थे और मांगकर भोजन करते थे। उनके निधन के बाद कोई अपना नहीं था, इसलिए उन्होंने बेटी का धर्म निभाया।
शालू सैनी के अनुसार, बेसहारा लोगों की अंतिम यात्रा को सम्मान देना उनके लिए कोई काम नहीं, बल्कि धर्म, कर्म और जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हर बेसहारा उनके परिवार का हिस्सा है और वह आगे भी ऐसे लोगों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देती रहेंगी।
बताया गया कि शालू सैनी पिछले कई वर्षों से लावारिस और बेसहारा मृतकों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाती आ रही हैं। उनके अनुसार अब तक छह हजार से अधिक शवों का अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। स्थानीय लोगों और पुलिस प्रशासन ने उनके इस कार्य की सराहना की।













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