हरिद्वार।बाबा नीब करौरी महाराज के प्रति गहरी आस्था रखने वाले श्याम नारंग का 98 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुनानकपुरा निवासी श्याम नारंग का बाबा नीब करौरी महाराज से गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव रहा। महाराज उन्हें उनके प्रिय भजन ‘माटी का पुतला’ के नाम से पुकारते थे।
वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान रावलपिंडी से भारत आए श्याम नारंग ने नैनीताल के तल्लीताल को अपना ठिकाना बनाया। उन्होंने तल्लीताल बाजार में व्यवसाय शुरू किया। इसी दौरान उनका रुझान आध्यात्मिकता की ओर बढ़ा और वह बाबा नीब करौरी महाराज के संपर्क में आए। वह बाबा के साथ भजन-कीर्तन भी किया करते थे।
श्याम नारंग द्वारा गाया जाने वाला ‘माटी का पुतला’ भजन बाबा नीब करौरी महाराज को विशेष रूप से पसंद था। इसी वजह से महाराज उन्हें इसी नाम से पुकारने लगे। जीवन के अंतिम पड़ाव तक बाबा की स्मृतियां और यह भजन उनके जीवन का अहम हिस्सा बने रहे।
श्याम नारंग का अंतिम संस्कार 27 सितंबर को राजपुरा स्थित मुक्तिधाम में किया गया। उनके परिवार में पत्नी प्रकाश नारंग, तीन पुत्र, दो पुत्रियां और पोते-पोतियां हैं।














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