हरिद्वार। ऊर्जा निगम के बहादराबाद उपखंड कार्यालय में सक्रिय कथित बाहरी लोगों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उन्हें अधिकारियों के कामकाज से लेकर विभागीय फाइलों तक की सारी जानकारी है। यहां तक कौन सी फाइल किस अधिकारी के पास है, किस फाइल में किस उपभोक्ता का मामला है और संबंधित प्रकरण की स्थिति क्या है, इसकी जानकारी भी इन लोगों को रहती है। यदि यह आरोप सही है तो मामला महज बाहरी लोगों के कार्यालय में आने-जाने का नहीं, बल्कि विभागीय गोपनीयता और उपभोक्ताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाता है।
शिकायत अधीक्षण अभियंता से की गई है। बता दें कि इन लोगों की भूमिका कार्यालय तक सीमित नहीं है। नए विद्युत कनेक्शन, सरकारी धन की रिकवरी, लाइन चार्ज कराने और अन्य विभागीय कामों में इनके सक्रिय रहने के आरोप हैं। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कथित बाहरी लोग विभागीय अधिकारियों के साथ फील्ड में भी नजर आते हैं और कुछ मामलों में अवर अभियंता स्तर के अधिकारियों को अपने निजी वाहनों से फील्ड तक ले जाते है।
मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि शिकायत के बाद अधीक्षण अभियंता स्तर से इन बाहरी लोगों के कार्यालय में प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद यदि उनका कार्यालय में आना-जाना जारी है तो सवाल सीधे आदेशों के अनुपालन पर है।
आखिर बिना विभागीय नियुक्ति, अनुबंध अथवा स्पष्ट अधिकृत जिम्मेदारी के किसी बाहरी व्यक्ति को उपभोक्ताओं की फाइलों और विभागीय कामकाज की जानकारी कैसे मिल रही है? क्या कार्यालय में फाइलों और उपभोक्ता डेटा की सुरक्षा के लिए कोई जवाबदेही तय है?
सबसे बड़ा सवाल उपखंड अधिकारी की भूमिका पर भी है। उच्च अधिकारियों के निर्देश के बावजूद यदि कथित बाहरी लोगों का प्रभाव कम नहीं हुआ तो फिर कार्यालय में नियंत्रण किसका है?













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