हरिद्वार। सुमन नगर स्थित टिहरी बांध पुनर्वास विकास समिति क्षेत्र में जलभराव ने करीब सौ परिवारों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। बारिश का पानी लंबे समय से जमा होने के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी लोग परेशान हैं। घरों के आसपास जमा पानी से उठ रही दुर्गंध ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
जिला प्रशासन लगातार सुमन नगर से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी निकाले जाने का दावा कर रहा है, लेकिन मौके की तस्वीर इन दावों से अलग नजर आ रही है। बुधवार को पानी निकासी के लिए लगाया गया ट्रैक्टर भी आधा-अधूरा काम छोड़कर चला गया। इसके बाद लोगों की परेशानी और बढ़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जल निकासी की व्यवस्था ही लगातार नहीं चल पा रही है तो प्रशासन के लाखों लीटर पानी निकालने के दावे किस आधार पर किए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि घर से निकलना मुश्किल है। बच्चों को स्कूल भेजना संभव नहीं हो पा रहा। पीने के पानी को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ऐसे हालात में लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। कई परिवारों के सामने अब यह सवाल खड़ा है कि वे इसी स्थिति में घरों में कैद रहें या अपना मकान बेचकर कहीं और चले जाएं।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर है। जिलाधिकारी के कई बार निर्देश के बावजूद सुमन नगर में स्थायी राहत नजर नहीं आ रही। जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे के विभाग की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। तहसीलदार सचिन कुमार का कहना है कि घरों में पानी घुसने पर तहसील प्रशासन और सड़कों पर जलभराव होने पर सिंचाई विभाग जिम्मेदार है। ऐसे में सवाल है कि आखिर जलभराव से जूझ रहे लोगों की जिम्मेदारी कौन लेगा?













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