POOJA SINGH देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (यूएसडीएमए) में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों और जल विद्युत परियोजनाओं के अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
बैठक में विनोद कुमार सुमन ने स्पष्ट कहा कि किसी भी बांध अथवा बैराज से पानी छोड़े जाने से पहले इसकी सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से दी जाए। सूचना में यह भी बताया जाए कि छोड़ा गया पानी कितनी देर में किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा, डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जलस्तर कितना बढ़ सकता है और संभावित प्रभाव क्या होंगे, ताकि समय रहते लोगों को सतर्क कर आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा सकें।
उन्होंने सभी परियोजनाओं को निर्देश दिए कि नदी जलस्तर सेंसरों और डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त आंकड़े एपीआई के माध्यम से रियल टाइम में यूएसडीएमए के साथ साझा किए जाएं। साथ ही ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम का विस्तार करने के भी निर्देश दिए गए। टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन को अपने क्षेत्र में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 25 करने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि एक ही नदी तंत्र में स्थित अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम बांधों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सभी परियोजनाएं जलस्तर, वर्षा और डिस्चार्ज से जुड़ी सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान करें, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई की जा सके।
बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने डिस्चार्ज सायरन, चेतावनी उपकरणों और विभिन्न सेंसरों की नियमित जांच के निर्देश दिए। संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में मशीनरी की अग्रिम तैनाती तथा जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में सिंचाई विभाग, यूजेवीएनएल, केंद्रीय जल आयोग, टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन, एनटीपीसी जोशीमठ, एनएचपीसी टनकपुर एवं धौलीगंगा, जीवीके अलकनंदा परियोजना, जेपी ग्रुप विष्णुप्रयाग तथा मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अधिकारी मौजूद रहे।














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