हरिद्वार। उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों का व्यापक सत्यापन शुरू होने जा रहा है। राज्य वक्फ बोर्ड ने सभी जिलों में वक्फ संपत्तियों का पूरा ब्योरा जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि वक्फ कमिश्नर के निर्देश पर सभी जिलाधिकारियों से वक्फ संपत्तियों का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है। अगले 10 दिनों में यह जानकारी बोर्ड को मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद संपत्तियों का सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
शादाब शम्स ने कहा कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड के गठन के समय उत्तर प्रदेश से वक्फ संपत्तियों का पूरा और प्रमाणिक रिकॉर्ड नहीं मिल पाया था। इसी वजह से वर्षों से संपत्तियों के वास्तविक आंकड़ों और उनके उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के आयुक्तों के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों से रिकॉर्ड एकत्र कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों का पूरा विवरण सामने आने के बाद बोर्ड के लिए अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई करना आसान होगा। यदि कहीं वक्फ भूमि पर अवैध कब्जा, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या संपत्तियों के दुरुपयोग के मामले सामने आते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शादाब शम्स ने कहा कि वक्फ संपत्तियों का उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है। बोर्ड की प्राथमिकता है कि इन संपत्तियों का सदुपयोग हो और गरीब एवं जरूरतमंद मुस्लिम परिवारों को इसका लाभ मिले। जिन लोगों के पास रहने का कोई साधन नहीं है या जिन्हें सहायता की आवश्यकता है, उनके लिए वक्फ संपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों से जिस स्तर की कार्रवाई दिखाई नहीं दी, अब वह तेजी से देखने को मिलेगी और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

उधर, पत्रकार इंतजार रजा ने कहा कि कलियर की वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। मैंने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और सभी वक्फ संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की थी। अब शासन स्तर पर सभी जिलों से वक्फ संपत्तियों का ब्योरा मांगा जाना स्वागतयोग्य कदम है। मेरी अपेक्षा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर हो तथा यदि कहीं भी अनियमितता, अवैध कब्जा या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। जनता को सच्चाई जानने का पूरा अधिकार है।














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