Home » विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी » खाद डालने से पहले अब मिट्टी बताएगी अपनी जरूरत, ‘धरती के डॉक्टर’ से होगी खेत की जांच

खाद डालने से पहले अब मिट्टी बताएगी अपनी जरूरत, ‘धरती के डॉक्टर’ से होगी खेत की जांच

Share This Article

हरिद्वार। खेत में फसल बोने से पहले मिट्टी की जरूरत जानना अब आसान होगा। किसान अंदाज से यूरिया, डीएपी या दूसरे उर्वरक डालने के बजाय मिट्टी की जांच के आधार पर तय कर सकेंगे कि खेत को किस पोषक तत्व की कितनी जरूरत है। हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) ने पतंजलि समूह की भरुआ एग्री साइंस की स्वचालित मृदा परीक्षण मशीन ‘धरती का डॉक्टर’ को अपनाते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार में नौ मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं। यहां किसान निशुल्क अपने खेत की मिट्टी की जांच करा सकेंगे।
एचयूआरएल की इस पहल का उद्देश्य केवल मिट्टी की जांच कराना नहीं, बल्कि उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल के जरिए खेती की लागत कम करना और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना है। कंपनी ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर समेत पूर्वांचल के कई जिलों, मेरठ तथा बिहार के बक्सर सहित अन्य क्षेत्रों में मशीनें स्थापित की हैं।

12 पैमाने बताएंगे खेत की सेहत

‘धरती का डॉक्टर’ मशीन मिट्टी के 12 प्रमुख मानकों की जांच करती है। इनमें पीएच, विद्युत चालकता, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज और बोरॉन शामिल हैं। जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि खेत की मिट्टी में कौन सा पोषक तत्व पर्याप्त है और किसकी कमी है।
मिट्टी में पहले से पर्याप्त फॉस्फोरस होने पर अतिरिक्त फॉस्फेट उर्वरक डालने की जरूरत नहीं होगी। वहीं जिंक, सल्फर या किसी अन्य पोषक तत्व की कमी मिलने पर उसकी पूर्ति के लिए उचित उर्वरक प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे एक ओर अनावश्यक खाद पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

जांच के साथ डिजिटल रिकॉर्ड भी

स्वचालित मशीन के जरिए मृदा परीक्षण की प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास किया गया है। भरुआ एग्री साइंस के अनुसार, एक नमूने की जांच में औसतन करीब 40 मिनट का समय लगता है। मशीन से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था में नमूने की जानकारी और स्थान आधारित रिकॉर्ड रखने की सुविधा भी है। जांच के परिणामों के आधार पर उर्वरक प्रबंधन का आकलन किया जा सकता है।
एचयूआरएल के प्रबंध निदेशक एसपी मोहंती के नेतृत्व में स्थापित की गई इन प्रयोगशालाओं को किसानों तक मृदा परीक्षण की सुविधा पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी का जोर है कि किसान फसल की जरूरत के साथ-साथ खेत की मिट्टी की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर उर्वरकों का इस्तेमाल करें।

कृषि वैज्ञानिकों ने भी किया परीक्षण

‘धरती का डॉक्टर’ मशीन का परीक्षण हरियाणा के करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों की ओर से किया गया है। कंपनी के अनुसार, परीक्षण के दौरान मशीन की 12 प्रमुख मृदा मानकों की जांच क्षमता का आकलन किया गया। एचयूआरएल का मानना है कि ऐसी तकनीक के माध्यम से मृदा परीक्षण को गांव और किसान तक पहुंचाना खेती को अधिक वैज्ञानिक और जरूरत आधारित बनाने में मदद करेगा।

Picture of India Lakshya News

India Lakshya News

India Lakshya News एक विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ पोर्टल है, जिसका उद्देश्य देश और दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और तेज खबरें पाठकों तक पहुंचाना है।
Picture of India Lakshya News

India Lakshya News

India Lakshya News एक विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ पोर्टल है, जिसका उद्देश्य देश और दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और तेज खबरें पाठकों तक पहुंचाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

Live Poll

Are You Satisfied India Lakshya News ?

Also Read This

Our Visitor

0 1 9 4 3 3
Users Today : 51
Users Yesterday : 316