POOJA SINGH देहरादून। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास, पुनर्निर्माण और वित्तीय सहायता से जुड़े विभिन्न मामलों में केंद्र सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है, लेकिन केंद्र सरकार हर आपदा की स्थिति में राज्यों को हरसंभव वित्तीय और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराती है।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड को राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के तहत ₹1012 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसमें ₹911.20 करोड़ केंद्र सरकार और ₹100.80 करोड़ राज्य सरकार का अंश है। केंद्र सरकार अपने हिस्से की पूरी राशि दो समान किस्तों में पहले ही राज्य को जारी कर चुकी है।
श्री राय ने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के ज्ञापन की प्रतीक्षा किए बिना 8 अगस्त 2025 को अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल का गठन किया। इस दल ने 7 से 9 सितंबर 2025 तक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया। राज्य सरकार द्वारा संशोधित ज्ञापन प्रस्तुत किए जाने के बाद अतिरिक्त वित्तीय सहायता की प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापन कार्यों के लिए पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) कराया जाता है। उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2025 की विभिन्न आपदाओं के बाद PDNA के आधार पर ₹10,998.95 करोड़ की सहायता का अनुरोध किया था। इसके सापेक्ष केंद्र सरकार ने ₹811.87 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है, जिसमें से पहली किस्त के रूप में ₹182.67 करोड़ 26 मई 2026 को जारी किए जा चुके हैं।
वन भूमि पर पुनर्वास के संबंध में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही वन भूमि का उपयोग निर्धारित शर्तों के तहत किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है, जहां हर वर्ष आपदाओं से जन-धन और आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान होता है। उन्होंने राज्य को निरंतर सहयोग देने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र की सहायता से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को गति मिलेगी।













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