Dehradun। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने लोक भवन में राष्ट्रीय सैनिक संस्था की ओर से आयोजित ‘नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्था के सदस्यों को सम्मानित किया। राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत युवाओं को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ नैतिक शिक्षा एवं चरित्र निर्माण से जोड़ना आवश्यक है। आत्मनिर्भर भारत और विश्व गुरु बनने के लक्ष्य को हासिल करने में संस्कारवान युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद और ऋषि-मुनियों की शिक्षाएं नई पीढ़ी को जीवन मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। सत्य, ईमानदारी, निष्ठा और आत्मानुशासन जैसे मूल्य ही राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं। नैतिक शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय सैनिक संस्था के सदस्यों से विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को चरित्र निर्माण, राष्ट्र प्रेम, अनुशासन और सेवा भावना के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि पूर्व सैनिकों के अनुभवों का उपयोग शैक्षणिक संस्थानों में नेतृत्व विकास और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने में किया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय सैनिक संस्था को आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि संस्था राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय चेतना के संवर्धन के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। इसके प्रयास युवाओं में राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
संगोष्ठी में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष कर्नल टीपी त्यागी, लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी बक्शी, मेजर जनरल जीके थपलियाल, प्रो. नीलम पंवार, राजन छिब्बर, मेजर जनरल ओपी सोनी सहित संस्था के पदाधिकारी, पूर्व सैनिक, शिक्षाविद् और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।














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