हरिद्वार। प्रदेश में शिक्षक-कर्मचारियों से जुड़े दो अहम मुद्दे सोमवार को सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंचे। 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त करने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर शिक्षक-कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने तर्क रखा कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में टीईटी की अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं है। पदाधिकारियों ने मांग की कि ऐसे शिक्षकों को टीईटी की बाध्यता से बाहर रखा जाए। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से सुनते हुए समाधान की दिशा में जल्द पहल का आश्वासन दिया।
उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, हरिद्वार के जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान ने कहा कि शिक्षक और कर्मचारी संगठनों का प्रयास संवाद एवं लोकतांत्रिक तरीके से समस्याओं का समाधान कराना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रतिनिधिमंडल को समय देकर समस्याएं सुनना और टीईटी के मुद्दे पर सकारात्मक रुख रखना महत्वपूर्ण है।
वहीं, पुरानी पेंशन बहाली संगठन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष जीतमणि पैन्यूली के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का मुद्दा भी उठाया। पदाधिकारियों ने इसे कर्मचारियों के भविष्य की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से इस पर आगे ठोस बातचीत की मांग की। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनते हुए इस मुद्दे पर भी आगे बातचीत का भरोसा दिया।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री इंजीनियर मुकेश रतूड़ी, कोषाध्यक्ष इंजीनियर शांतनु शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, जगमोहन सिंह रावत, संतोष गड़ोई, विकास शर्मा, हरिद्वार जिलाध्यक्ष सुखदेव सैनी, जिला महामंत्री दीपक चौहान सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।














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