India lakshya news करीब 50 वर्ष पहले यह शहर देश के सबसे सनसनीखेज सिलसिलेवार हत्याकांडों का गवाह बना था। वर्ष 1976-77 के दौरान महज 14 महीनों में हुई 10 निर्मम हत्याओं ने पूरे महाराष्ट्र में दहशत फैला दी थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इन वारदातों को किसी पेशेवर गैंग ने नहीं, बल्कि अभिनव कला महाविद्यालय के चार छात्रों ने अंजाम दिया था।
मामला महाराष्ट्र पुणे आईटी हब और आधुनिक शहर से जुड़ा हुआ है।
इस गैंग का मास्टरमाइंड राजेंद्र जक्कल था, जबकि उसके साथ दिलीप जगताप, शांताराम जगताप और मुनव्वर हारुन शाह शामिल थे। देश के प्रतिष्ठित अखबार hindustan ने अपने लेख में लिखा है कि हत्या का सिलसिला 16 जनवरी 1976 को अपने ही साथी छात्र प्रकाश हेगड़े के अपहरण और हत्या से शुरू हुआ। फिरौती मांगने के बाद उसकी हत्या कर शव को ड्रम में बंद कर भाटघर बांध में फेंक दिया गया। इस वारदात से उन्हें महज 50 रुपये मिले, लेकिन यहीं से उनके भीतर अपराध का हौसला बढ़ गया।
इसके बाद गैंग ने 31 अक्टूबर 1976 को उद्योगपति अच्युत जोशी के परिवार को निशाना बनाया और कुछ ही हफ्तों बाद 1 दिसंबर 1976 को भंडारकर रोड स्थित ‘स्मृति’ बंगले में घुसकर पांच लोगों की निर्मम हत्या कर दी। पीड़ितों के हाथ-पैर बांधकर उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया जाता था और नायलॉन की रस्सी से गला घोंटकर हत्या की जाती थी। इस तरीके से हत्या में खून तक नहीं निकलता था।
लगातार हो रही हत्याओं से पुणे में ऐसा भय फैल गया कि शाम ढलते ही बाजार सूने हो जाते थे और लोगों ने घरों में लोहे की ग्रिल लगवानी शुरू कर दी। पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था।
आखिरकार अपराधियों की सबसे बड़ी गलती ही उनकी गिरफ्तारी का कारण बनी। शराब के नशे में राजेंद्र जक्कल ने अपने दोस्त सुहास चांडक के सामने हत्याओं का जिक्र कर दिया। सुहास ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जांच के दौरान जक्कल की कस्टमाइज्ड रॉयल एनफील्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस तरह पुणे को दहला देने वाले इस खूनी सिलसिले का अंत हुआ।














Users Today : 65
Users Yesterday : 127