हरिद्वार (POOJA SINGH) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से युवा आयोग की घोषणा के बाद अब उत्तराखंड में क्षत्रिय आयोग की मांग ने भी जोर पकड़ लिया है। हरिद्वार के चार अधिवक्ताओं ने क्षत्रिय समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति का तथ्यात्मक अध्ययन कराने तथा इसके आधार पर राज्य क्षत्रिय आयोग के गठन की अनुशंसा किए जाने की मांग को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग, देहरादून में याचिका दाखिल की है।
याचिका दाखिल करने वालों में अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, सुमेधा भदोरिया एडवोकेट और एलएलबी छात्र चेतन भदोरिया शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि क्षत्रिय समाज को एकसमान आर्थिक स्थिति वाला मानना उचित नहीं है। समाज में आर्थिक रूप से कमजोर, निर्धन, बेरोजगार, ग्रामीण, किसान, श्रमिक और पूर्व सैनिक परिवार भी हैं, जिनके सामने शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जुड़ी चुनौतियां हैं।
याचिकाकर्ताओं ने मानवाधिकार आयोग से सरकार से यह जानकारी मांगने का आग्रह किया है कि वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद से अब तक क्षत्रिय समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति पर कोई व्यापक सर्वेक्षण या अध्ययन कराया गया है या नहीं।
याचिका में नया पेंच यह है कि रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने पर विशेषज्ञ समिति गठित कर हर जिले से आंकड़े जुटाने और समाज की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कराने की मांग की गई है। समिति में समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, विधि, शिक्षा, रोजगार और मानवाधिकार क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव है।














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