POOJA SINGH हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर में सोहन हलवा, हलवा पराठा और शीरमाल के ठेके को लेकर नया विवाद सामने आया है। शीरमाल बिक्री को लेकर शुरू हुए विवाद ने दरगाह प्रशासन की ठेका व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस ठेके की अनुमति केवल एक दुकान के लिए दी गई थी, उसका संचालन कथित रूप से सात दुकानों तक फैल गया है। इससे न केवल नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं, बल्कि दरगाह के राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
हाल ही में शीरमाल बिक्री को लेकर कुछ दुकानदारों और ठेकेदार के बीच विवाद सामने आया था। मामले में संयुक्त मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी ठेकेदार को अन्य दुकानदारों को शीरमाल बेचने से रोकने का अधिकार नहीं है। प्रशासन के इस बयान के बाद ठेका प्रक्रिया और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यदि ठेका केवल एक दुकान के लिए स्वीकृत किया गया था, तो फिर एक ही ठेकेदार का कारोबार कई दुकानों तक कैसे पहुंच गया। उनका आरोप है कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है और छोटे व्यापारियों की आजीविका संकट में पड़ गई है।
दुकानदारों का यह भी कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा कई दुकानों के माध्यम से कारोबार संचालित किया जा रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका दावा है कि पूरे कारोबार का वार्षिक टर्नओवर एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जबकि दरगाह प्रशासन को मिलने वाला राजस्व वास्तविक क्षमता के अनुरूप नहीं है।
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि ठेका प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराई जाए, सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि कुछ लोगों के कथित सिंडिकेट के कारण छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।
संयुक्त मजिस्ट्रेट के बयान के बाद अब यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं रखी तो विवाद और गहरा सकता है।














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