हरिद्वार(POOJA SINGH) भूपतवाला स्थित सौ वर्ष से अधिक पुरानी अमेरिकन आश्रम/स्वामी देवानंद ट्रस्ट की संपत्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। भाजपा पार्षद सुनीता शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर से मुलाकात कर आश्रम की संपत्ति की कथित बिक्री और रजिस्ट्री की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने जांच पूरी होने तक संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने और उसे सरकारी संरक्षण में लेने की मांग भी उठाई। अधिकारियों ने मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
पार्षद सुनीता शर्मा ने कहा कि अमेरिकन आश्रम हरिद्वार की प्राचीन धार्मिक धरोहरों में शामिल है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों की आस्था भी इससे जुड़ी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति को कथित रूप से गुपचुप तरीके से बेचकर रजिस्ट्री कराई गई। ऐसे में संपत्ति से जुड़े पुराने दस्तावेजों, रजिस्ट्री और वित्तीय लेनदेन की जांच आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार आश्रम परिसर में पूर्व में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारा, निशुल्क दवा वितरण और धर्मशाला जैसी सेवाएं संचालित होती थीं। आरोप लगाया गया कि निजी कब्जे के कारण इन सुविधाओं का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। कांवड़ मार्ग प्रभावित होने का आरोप भी प्रतिनिधिमंडल ने लगाया।
प्रतिनिधिमंडल ने ट्रस्ट की संपत्ति के हस्तांतरण और बिक्री से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जांच कराने की मांग की। आरोप है कि सक्षम न्यायिक अनुमति के बिना संपत्ति की रजिस्ट्री कराई गई। जांच में यह स्पष्ट करने की मांग की गई कि संपत्ति का हस्तांतरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ और उससे जुड़ी धनराशि का लेनदेन किस प्रकार किया गया।
ये रखीं प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने मामले की उच्चस्तरीय एसआईटी जांच, कथित अवैध बिक्री की जांच कर आवश्यक कार्रवाई, दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, कथित अवैध निर्माण पर रोक लगाने तथा संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों, रजिस्ट्री, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की फोरेंसिक जांच की मांग की। साथ ही जांच पूरी होने तक संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग भी की गई।
सुनीता शर्मा ने कहा कि निष्पक्ष जांच से ही आश्रम की संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व, रजिस्ट्री और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों का खुलासा हो सकेगा। धार्मिक धरोहर से जुड़े मामले में प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई कर आश्रम की संपत्ति और उससे जुड़ी धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का संरक्षण सुनिश्चित करना चाहिए।














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