हरिद्वार (POOJA SINGH) ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां अभी से जोर पकड़ने लगी हैं। भाजपा की सक्रिय नेत्री रह चुकीं उर्मिला सनावर ने बहादराबाद और ज्वालापुर क्षेत्र में जगह-जगह रक्षाबंधन की शुभकामनाओं वाले पोस्टर लगवाकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि इन पोस्टरों में कहीं भी भाजपा का उल्लेख नहीं किया गया है। इससे राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
उर्मिला सनावर खुद मौके पर खड़ी होकर पोस्टर लगवाती नजर आईं। पोस्टरों में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज, भारतरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई हैं, जबकि नीचे उर्मिला सनावर की तस्वीर के साथ लोगों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी गई हैं। पोस्टरों पर भाजपा का चुनाव चिह्न, पार्टी का नाम या किसी राजनीतिक पद का उल्लेख नहीं है।
सनावर भाजपा में सक्रिय सदस्य और नेत्री के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। ऐसे में भाजपा की पृष्ठभूमि रखने वाली सनावर का अपने पोस्टरों से पार्टी का नाम पूरी तरह अलग रखना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि इन पोस्टरों को आधिकारिक तौर पर चुनाव प्रचार नहीं कहा गया है, लेकिन ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र में उनकी बढ़ती सक्रियता को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
उर्मिला सनावर पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में किसी राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ने के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर सकती हैं। उनका कहना है कि वह महिलाओं और दलित समाज से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना चाहती हैं और जनता के बीच रहकर काम करना उनका उद्देश्य है।
सनावर की राजनीतिक सक्रियता का एक और महत्वपूर्ण पहलू अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा रहा है। उन्होंने इस मामले में कथित ‘वीआईपी’ एंगल को लेकर मुखर होकर आवाज उठाई थी। उनके बयानों और उपलब्ध कराई गई सामग्री के बाद मामला प्रदेश की राजनीति में फिर चर्चा के केंद्र में आया। हालांकि इस प्रकरण से जुड़े आरोप और दावे जांच का विषय हैं और उन्हें किसी निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
अब ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र में रक्षाबंधन के बहाने लगाए गए इन पोस्टरों ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ भाजपा की पृष्ठभूमि रखने वाली उर्मिला सनावर हैं, तो दूसरी ओर उनके पोस्टरों में पार्टी का कोई उल्लेख नहीं है। यदि वह निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरती हैं तो ज्वालापुर में मुकाबले के समीकरण बदल सकते हैं।
फिलहाल सनावर की पोस्टर मुहिम को चुनावी घोषणा के बजाय उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में उनका रुख और संगठनात्मक गतिविधियां यह स्पष्ट करेंगी कि वह वास्तव में निर्दलीय चुनाव की तैयारी कर रही हैं या उनकी राजनीतिक रणनीति में कोई नया मोड़ आने वाला है।














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