देहरादून। देश के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार एवं साहित्य अकादमी के बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर 26वें राष्ट्रीय ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई द्वारा किया गया। यह व्याख्यान उनके नवीनतम काव्य संग्रह ‘माँएं नहीं करतीं कभी आराम’ पर केंद्रित रहा, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के कुलपति पद्मश्री प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने की। उन्होंने कहा कि किसी भी रचनाकार की पहचान उसकी रचनाओं से होती है और प्रो. चमोला का यह काव्य संग्रह संवेदना, विचार और जीवन-संघर्ष का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि संग्रह की 64 कविताएँ प्रकृति, मानवीय मूल्यों और समकालीन यथार्थ को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनके अनुसार, जो साहित्यकार अपने समय की धड़कनों और संघर्षों को शब्द देता है, वही कालजयी बनता है।
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. एम.के. पांडे ने कहा कि प्रो. चमोला ने साहित्य की लगभग सभी प्रमुख विधाओं में उल्लेखनीय सृजन किया है। उनकी कविताएँ जीवन-मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और समय की विसंगतियों को गहरी संवेदनशीलता के साथ सामने लाती हैं तथा पाठकों के मन पर स्थायी प्रभाव छोड़ती हैं।
आमंत्रित विद्वान मणिपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. ए.के. शंखधर ने कहा कि वे छात्र जीवन से ही प्रो. चमोला की रचनाओं से परिचित हैं। उनके अनुसार, समकालीन हिंदी कविता में जहाँ वैचारिक गहराई का अभाव दिखाई देता है, वहीं प्रो. चमोला की कविताएँ प्रकृति, संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय मूल्यों का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करती हैं।
कार्यक्रम के संयोजक एवं दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के कुलसचिव प्रो. मंजुनाथ अंबिग ने कहा कि प्रो. चमोला का बहुआयामी साहित्य देश के विद्वानों को एक साझा मंच पर जोड़ने का कार्य कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन भावना गौड़, लेखक परिचय रीना संधू तथा सरस्वती वंदना महालक्ष्मी अंबिग ने प्रस्तुत की।
प्रो. दिनेश चमोला ‘शैलेश’ पिछले साढ़े चार दशकों से हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में सक्रिय हैं। वे सात दर्जन से अधिक पुस्तकों के रचनाकार हैं तथा साहित्य अकादमी के बाल साहित्य पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं। उनकी रचनाओं पर देश के कई विश्वविद्यालयों में शोध कार्य भी संपन्न हो चुके हैं। उनके नवीन काव्य संग्रह ‘माँएं नहीं करतीं कभी आराम’ को समकालीन हिंदी कविता की महत्वपूर्ण कृति के रूप में सराहा जा रहा है।














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