हरिद्वार। धनौरी इंटर कॉलेज (एनआईसी) का मामला एक बार फिर चर्चा में है। नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आठ पृष्ठ का विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ एसआईटी और विजिलेंस से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। शिकायत के साथ विभिन्न विभागों के पत्र, जांच रिपोर्टों और अन्य दस्तावेजों का भी हवाला दिया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर समाचार लिखे जाने तक कॉलेज प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आ पाया था।
ट्रस्ट के सचिव प्रियांशु काम्बोज ने आरोप लगाया कि वर्ष 1984 से अब तक कॉलेज में फर्जी सदस्यता, नियमविरुद्ध चुनाव, वर्ष 2012 में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कथित फर्जी नियुक्तियां, राज्य कोष से अवैध वेतन भुगतान, सरकारी अभिलेख गायब करने तथा ग्राम समाज और सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे जैसी गंभीर अनियमितताएं होती रही हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन मामलों से सरकारी राजस्व, विद्यालय की संपत्ति और स्थानीय छात्रों के हित प्रभावित हुए हैं।
शिकायत में यह भी दावा किया गया कि शासन और शिक्षा विभाग की विभिन्न जांचों में नियुक्तियां निरस्त करने, वेतन रोकने, सरकारी धन की वसूली तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका प्रभावी अनुपालन नहीं हुआ। वर्ष 2022 में दर्ज एफआईआर का भी उल्लेख करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ग्राम समाज की लगभग 160 बीघा भूमि और सिंचाई विभाग की सरकारी भूमि से जुड़े मामलों की भी जांच आवश्यक है। बिना वैध लीज के सरकारी भूमि पर कॉलेज के साथ दुकानें, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने तथा करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि के कम कीमत पर हस्तांतरण का भी आरोप लगाया गया है। ट्रस्ट ने पूरे प्रकरण की एसआईटी व विजिलेंस जांच, फोरेंसिक ऑडिट और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।














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