हरिद्वार (PRAVEEN KUMAR)आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उन सीटों पर विशेष रणनीति लागू कर दी है, जहां पार्टी अब तक जीत दर्ज नहीं कर सकी है। चकराता, पिरान कलियर, मंगलौर और धारचूला जैसी चार अभेद्य सीटों पर प्रदेश कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपते हुए संगठन ने माइक्रो मैनेजमेंट शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यमुनोत्री, भगवानपुर और हल्द्वानी जैसी सीटों पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।
भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती चकराता सीट है, जहां 2002 से 2022 तक हुए सभी पांच विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रीतम सिंह लगातार विधायक चुने गए। पिरान कलियर सीट पर 2012, 2017 और 2022 में कांग्रेस के फुरकान अहमद लगातार विजयी रहे। मंगलौर में 2002, 2007 और 2012 में बसपा, 2017 में कांग्रेस, 2022 में फिर बसपा तथा 2024 के उपचुनाव के बाद कांग्रेस का कब्जा है। वहीं धारचूला में 2002 और 2007 में निर्दलीय गगन सिंह रजवार तथा 2012, 2017 और 2022 में कांग्रेस के हरीश धामी जीते। 2014 के उपचुनाव में भी भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा।
इसी के साथ भाजपा यमुनोत्री, भगवानपुर और हल्द्वानी सीटों पर भी विशेष रणनीति के तहत काम कर रही है। यमुनोत्री में भाजपा केवल 2017 में जीत दर्ज कर सकी, जबकि भगवानपुर में 2002 के बाद पार्टी दोबारा नहीं जीत पाई। हल्द्वानी में भी 2007 को छोड़कर 2002, 2012, 2017 और 2022 में कांग्रेस लगातार जीतती रही है।
पार्टी संगठन ने इन सभी सीटों पर बूथ समितियों, मंडलों, मोर्चों और प्रकोष्ठों को सक्रिय कर दिया है। संभावित उम्मीदवारों को लेकर अंदरूनी सर्वे और सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि चुनौतीपूर्ण सीटों पर लंबे समय से तैयारी चल रही है और संगठन प्रत्येक बूथ तक पहुंच बनाकर जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।














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