हरिद्वार। जिले में 15 अगस्त के मद्देनजर जिलाधिकारी की ओर से शराब की बिक्री पर रोक के आदेश के बावजूद सिडकुल थाना क्षेत्र में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव में शराब खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती रही, लेकिन संबंधित विभाग कार्रवाई करने के बजाय पूरी तरह निष्क्रिय नजर आया।
स्थानीय स्तर पर मामले की सूचना आबकारी विभाग को दिए जाने का दावा किया गया, इसके बावजूद मौके पर पहुंचकर बिक्री रोकने या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की कोई प्रभावी पहल नहीं हुई। इससे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 15 अगस्त को शराब की बिक्री पर प्रशासनिक स्तर से रोक के निर्देश थे, तो आखिर अवैध शराब गांव तक पहुंची कैसे? क्या शराब तस्करों को विभागीय निगरानी का कोई डर नहीं था या फिर क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था ही पूरी तरह फेल रही?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सूचना मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो इससे अवैध शराब कारोबारियों के हौसले बढ़ना स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेशों के बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का पालन क्यों नहीं कर पाए।
मामले ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और प्रवर्तन कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच करता है या फिर मामला महज खानापूर्ति तक सीमित रह जाता है।














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