POOJA SINGH हरिद्वार। विकासखंड नारसन की ग्राम पंचायत पीरपुरा में मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। परिवहन विभाग के हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी को मनरेगा मजदूर दर्शाकर भुगतान कर दिया गया। लोकपाल मनरेगा की जांच में मामला सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति ने प्राप्त ₹19,754 की पूरी राशि राजकोष में जमा करा दी, जबकि ग्राम रोजगार सहायक और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
ग्रामीणों की शिकायत पर लोकपाल बीएस नेगी ने मामले की जांच कराई। शिकायत में तालाब की मिट्टी के अवैध विक्रय, ग्राम पंचायत निधि के दुरुपयोग और मनरेगा के तहत फर्जी भुगतान के आरोप लगाए गए थे। 29 मई को किए गए स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखों के सत्यापन में यह तथ्य सामने आया कि वसीम पुत्र इदरीश संबंधित अवधि में परिवहन विभाग के हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के रूप में कार्यरत थे, लेकिन उन्हें मनरेगा मजदूर दिखाकर भुगतान किया गया।
जांच के दौरान वसीम ने भुगतान प्राप्त होने की बात स्वीकार करते हुए इसे त्रुटिवश हुआ बताया और पूरी राशि वापस जमा करा दी। लोकपाल ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेखों के सत्यापन में गंभीर लापरवाही और मनरेगा की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
प्रकरण में दोषी पाए जाने पर संबंधित ग्राम रोजगार सहायक पर गलत मस्टर रोल में उपस्थिति दर्ज कराने और भुगतान की संस्तुति करने के लिए एक हजार रुपये तथा तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर भी एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही खंड विकास अधिकारी, नारसन को दंडादेश का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।














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